Wednesday, September 05, 2007

मेरा पेहला हिंदी blog

अपनी मातृभाषा में लिखना अच्छा लग रह है। बहुत समय हो गया हिंदी में कुछ भी लिखे हुए :-(।

पाठशाला में हिंदी में बड़ा मज़ा आता था। अंग्रेजी तो कभी दिमाग में ही नहीं घुसी, हीही। चलो, ऐसा ही रहा तो काम और चिट्ठी पत्री भी हिंदी में करुंगा ;-) ।

अपने दोस्तो को भी हिंदी में थोड़ी बहुत गालियाँ दे डाली, उन्होने भी पलट कर जवाब दिया। हेहे।

आज दादा की एक टिपण्णी डीएनए अखबार में आयी है। उनकी फोटो भी काफी अच्छी है। पक्का लडकियां उनके पीछे और भागेंगी।

शायद से हिंदी में ज़्यादा अच्छा लिख पाऊंगा। बस आप लोग इस जगह को बार-बार देखते रहियेगा।

फिलहाल, मुझे आज्ञा दीजिए। शब्बा खेर।

- रोहित निगम

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